अंत्येष्टि में गया परिवार दुर्घटना का शिकार

मंगलवार, 28 जून 2011
27 जून 2011 सोमवार को साढे 11 बजे एक रिश्तेदार के देहावसान की सूचना मिली। तुरत-फ़ुरत हम अंत्येष्टि कार्यक्रम में शामिल होने मोटर सायकिल से 120 किलो मीटर के सफ़र के लिए चल पड़े। हाईवे के 4 किलो मीटर पर पहुंचे, एक भीषण कार दुर्घटना देखने मिली। यह कार भी खड़ी गाड़ी में पीछे से टकरा गयी थी। हालात देखने से लगा कि वैन में परिवार था, छोटे बच्चों एवं महिलाओ के चप्पल भी दुर्घटना स्थल पर पड़े थे।


सड़क गंगा ब्लॉग प्रारंभ होने के बाद 17 जून को हेमचंद एवं 20 तारीख को दो अन्य युवकों की मौत सड़क दुर्घटना में हुई। कल की दुर्घटना में वैन सवार सभी एक ही परिवार के थे। राजिम का कंसारी परिवार बेटी की ससुराल में किसी की मौत पर अंत्येष्टि में शामिल होने गया था। इसमें कोमल प्रसाद कंसारी पिता किसुन कंसारी 58 वर्ष की घटना स्थल पर ही मृत्यु हो गयी।
वैन सवार कंसारी के परिजनों में दीपक कंसारी 35  वर्ष, मन्नु कंसारी 35 वर्ष, मन्नु की पत्नी 30 वर्ष और उसके दो  बच्चे अभिषेक 12 वर्ष एवं अन्जु 6 वर्ष के अलावा ड्रायवर मुस्तकीन खान घायल हो गए। दीपक एवं मन्नु के सिर में गंभीर चोटे आई हैं, जिन्हे रामकृष्ण हास्पिटल में भर्ती किया गया है। यह दुर्घटना ग्राम केन्द्री के समीप हुई।
घटना रवि-सोम की रात की साढे बारह बजे की है, अभनपुर रोड़ केन्द्री गांव के पास  ट्रक क्रमांक सीजी 07 एच 0405 का टायर पंचर हुआ था। जिसे रोड़ पर खड़ी करके टायर बदला जा रहा था इसी बीच  तेज गति से आ रही मारुति वैन क्रं सीजी 04 एच ए 7978 उससे टकरा गयी।
टक्कर इतनी भीषण थी कि वैन के चिथड़े उड़ गए, इसमें फ़ंसे लोगों को मुस्किल से निकाला गया। वैन की छत उड़ चुकी थी।

5 टिप्पणियाँ:

  1. देखकर रोंगटे खड़े हो गए ...बहुत ह्दय विदारक द्रश्य हैं .हम गाडी अपनी ख़ुशी केलिए खरीदते हैं न की दुःख के लिए...

  1. S.M.HABIB ने कहा…:

    हे भगवान...... ए सड़क हर जीलेवा हो गे हवे भईया....
    अतिरिक्त सावधानी अब्बड़ जरुरी हवे....
    जमो झन के स्वास्थ बर भगवान ले बिनती हवे....

  1. राज भाटिय़ा ने कहा…:

    भारत मे कोई कानून नही, कोई नियम नही ट्रेफ़िक का, इस कारण यह दुर्घटनाऎ होती हे, हमे नये ट्रेफ़िक के नियम अनुसार बदलना चाहिये, ओर उन नियमो का कठोरता से पालन करना चाहिये, तभी कम सुरक्षित रह पायेगे, कानून तोडने वाले को सख्त से सख्त सजा मिले

  1. Archana ने कहा…:

    दुखद...

एक टिप्पणी भेजें

कोई काम नहीं है मुस्किल,जब किया ईरादा पक्का।
मै हूँ आदमी सड़क का,-----मै हूँ आदमी सड़क का

 
NH-30 © 2011 | Designed by NH-30